कैंसर – कारण,लक्षण,उपाय

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कैंसर का कारण: शरीर के किसी भी अंग में कोशिकाओं की संरचना में अज्ञात कारणों से परिवर्तन होकर उनमें कैंसर जन्य तत्वों की प्रवृत्ति बन जाती है। जब ऐसे काफी सारे सेल इकट्टे हो जाते हैं, तो किसी भी अंग में कैंसर की उत्पत्ति होती है।

कैंसर की उत्पत्ति शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति में कमी आने के कारण होती है। तम्बाकू, शराब आदि पदार्थों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों में रोग उत्पन्न होने की संभावना अधिक होती है।

कैंसर का लक्षण

शरीर के किसी भी अंग में गांठ बन जाना, कमजोरी, भार में कमी आदि लक्षण इस रोग में देखने को मिलते हैं। शरीर के जिस भाग में कैंसर हो, उसके अनुसार लक्षण अलग से मिलते हैं, जैसे आमाशय के कैंसर में भूख की कमी और कब्ज़। इसी प्रकार फेफड़े के कैंसर में छाती में दर्द, खांसी या रक्त वमन आदि।

कैंसर का घरेलू उपाय

तुलसी के 30-35 पत्तों की चटनी बनाकर छाछ के साथ सुबह-शाम दें। खाने के लिए दूध या दही ही दें।

रोगी को पूरे दिन केवल गाजर का रस पिलाएं। लगभग एक माह में पूर्णत: आराम हो जाएगा।

मेथी के दानों को रातभर पानी में भिगोकर रखें। अगले दिन व रात उसे गीले कपड़े में टांगकर रखें, जिससे वे अंकुरित हो जाएं। मेथी के ये अंकुरित दानें सुबह-शाम आधा मुट्ठी लेकर अच्छी तरह चबा कर खाएं।

गेहूं के अकुंरित दानों को बहुत ही बारीक पीसकर एक चम्मच देसी घी में हलका-सा भूनें और ऊपर से दूध डाल दें। यह दूध सुबह-शाम लें।

आधा-आधा कप चुकंदर का रस रोगी को सुबह-शाम दें। चाहें तो इसमें तीन से चार गुना तक गाजर का रस भी मिला सकते हैं।

टमाटर व पालक का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-एक गिलास सुबह-शाम दें। इसमें एक बड़े नीबू का रस भी मिला लें।

मूंग, चना, सोयाबीन, गेहूं व मेथी बराबर मात्रा में लें और अंकुरित होने पर अच्छी तरह पीसकर दही के साथ लें। दही खट्टी न हो।

लहसुन की 1-2 कलियां कूट-पीसकर पानी के साथ पिएं। यह पेट के कैंसर में विशेष रूप से लाभदायक है।

प्रात:काल काली तुलसी के पत्ते चबाकर ऊपर से गोमूत्र पिएं।

आयुर्वेदिक औषधियां

गुल्महर चूर्ण, वज्र भस्म, मल्लसिन्दूर, गन्धक रसायन, कांचनार गुग्गुल, शिग्रुगुग्गुल, रस माणिक्य, केसरगजकेशरी रस, आरोग्यवर्धिनी वटी, संजीवनी वटी, रसांजनघन वटी आदि।

पेटेंट औषधियां

डिवाइन हैल्थ एड व डिवाइन लाइफ कैप्सूल (बी.एम.सी. डिवाइन फार्मा)।

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