Class 2 short moral stories in Hindi: दोस्तों आज हम कुछ मोरल कहानियो के बारे में पढ़ेंगे Class 2 short moral stories in Hindi निचे कुछ कहानिया है जो आपको पढ़ने में मजेदार लगेगी ये मोरल कहानिया आपको आपके क्लास होम वर्क में भी बहुत मदद करेंगी।
Class 2 short moral stories in Hindi
Short moral stories in hindi कथाएँ कहानिया काल्पनिक होते हुए भी मन में उड़ान भर देने वाली और शिक्षाप्रद होती हैं। इनमें विभिन्न पात्रों जैसे कि मानवीकृत पशु, पक्षिओं, वृक्षों, अप्सराएँ, पिशाच, राक्षस, जादूगर, दानव और सारी प्रकृति का मिलनसार होता है।
कई ऐसे मजेदार पात्र भी होते है जिन्हे बड़े हों या छोटे सब पसंद करते हैं। बच्चों को Class 2 short moral stories in Hindi इसलिए अच्छी लगती हैं क्योंकि इन्हें समझना आसान होता है, इनका अंत आमतौर पर सुखान्त होता है और इनमें अच्छाई की बुराई पर विजय होती है। और भी कई सारी सिख मिलती है।
बला टली – Class 2 short moral stories
सोहन अपने खेत की रखवाली कर रहा था। तभी उसने देखा कि एक व्यक्ति अपने घोडे पर सरपट भागता हुआ आया और आगे निकल गया। थोडी ही देर बाद उसके पीछे-पीछे कोतवाल भी अपने सिपाहियों सहित पहुँचा। उसने सोहन से पूछा कि उसने किसी को घोड़ा ले जाते देखा है। सोहन समझ गया कि अभी जो घोड़े पर सरपट भाग रहा था। वह कोई चोर था, जिसे पकड़ने के लिए इतने सारे सिपाही उस के पीछे आये है।
उसने कहा कि देखा तो है कोतवाल जी वह आगे कुछ कहता इससे पहले ही कोतवाल ने कहा कि तुम हमारे साथ चलो और बताओ कि वह किधर गया है। सोहन को उसके पिता खेत की रखवाली करने के लिए छोड़ गये थे।
उसने सोचा कि चोरों को पकड़ना कोतवाल का काम है, उसका काम तो खेत की रखवाली करना है, पर कोतवाल के आगे जो बात निकल गयी,सो निकल गयी। अब अपना काम आसान करने के लिए यह मेरे सामने मुश्किल खड़ी कर देगा। पिता भी नाराज होगें कि अपने हाथ का काम क्यो छोड़ा।
आयी आफत को टालने के लिए कोतवाल से कहा, मैने देखा है उस घोड़े के बड़े-बड़े सींग से और वह आदमी उसके सींगों में रस्सी बाँध कर इसी तरफ से गया है, आप इसी रास्ते से तेजी से चले जायें। इतना कहते ही कोतवाल ने अन्दाजा लगाया कि लड़के ने घोड़ा नहीं देखा, गाय देखी है। उसने सोहन को छोड़ा और अपने सिपाहियों सहित चोर को तलाशने के लिए आगे बढ़ गया। अपनी बला दूसरों पर टालने वाले के साथ कोई सहयोग नहीं करता।
सेर को सवा सेर – Class 2 short moral stories
राजू पंसारी और मंगू फलवाले की दुकानें पास-पास थीं। एक दिन राजू को अलग से एक तराजू और बाट की जरुरत पड़ी। उसने मंगू से कहा, मुझे कुछ देर के लिए तुम्हारा तराजू और बाट चाहिए। काम होते ही मैं तुम्हें लौटा दूँगा। मंगू ने उसे अपना तराजू और बाट दे दिया।
कुछ देर बाद जब मंगू ने अपना तराजू और बाट माँगा, तो राजू ने कहा, भैया, माफ करना, मैं तुम्हें तुम्हारा सामान नहीं लौटा पाऊँगा। उसे तो चूहे खा गये। राजू की बात सुनकर मंगू को बहुत गुस्सा आया। लेकिन उसने गुस्सा दबाते हुए कहा, कोई बात नहीं। अब चूहे खा गये हैं, तो इसमें तुम्हारा क्या दोष? यह कहकर वह अपनी दुकान में चला गया।
अगले दिन मंगू ने राजू से कहा, मैं तराजू और बाट खरीदने शहर जा रहा हूँ। कुछ और जरूरी सामान भी लाना है। क्या तुम अपने बेटे को मेरे साथ भेज सकतें हो? राजू ने अपने बेटे को मंगू के साथ भेज दिया। शाम को मंगू को अकेला लौटा देख राजू ने उससे पूछा, मेरा बेटा।
कहाँ है? मंगू, ने कहा, क्या बताऊँ भैया,उसे सारस उठा कर ले गया। उसकी बात सुनकर राजू को गुस्सा आ गया। वह गुस्से से भुनभुनाते हुए बोला, इतने बड़े लाड़के को भला सारस कैसे उठा कर ले जा सकता है? मंगू ने कहा, ठीक उसी तरह, जिस तरह इतने बड़े तराजू और बाट को चूहे खा सकते है।
उसकी बात सुनकर राजू को अपनी गलती का एहसास हो गया। उसने मंगू को उसका सामान लौटा दिया और कहा, अब तो बता दो मेरा बेटा कहाँ है? मंगू, उसे अपने घर ले गया। वहाँ उसका बेटा आराम से भोजन कर रहा था। उसे सकुशल देखकर राजू ने मंगू को धन्यवाद दिया और अपनी गलती के लिए माफी माँगी।
Class 2 short moral stories in Hindi